सीएम शिंदे से ओबीसी वर्ग की शिकायत

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सीएम शिंदे से ओबीसी वर्ग की शिकायत

ठाणे। ओबीसी वर्ग के जाति निहाय जनगणना को लेकर पूर्व में गठित की गई बंठिया आयोग की रिपोर्ट संदेहास्पद है । इस परिप्रेक्ष्य में ओबीसी जनमोर्चा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दशरथ पाटिल ने राज्य के सीएम उद्धव एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर उनसे आग्रह किया कि ठाणे शहर में ओबीसी समाज का जातीनिहाय मिनी सर्वे कराया जाए। इस बाबत सीएम शिंदे ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इसको लेकर बैठक आयोजित की जाएगी । उन्होंने ओबीसी समाज के शिष्टमंडल को आश्वासन दिया कि सप्ताह भर में इस मामले को लेकर सरकारी स्तर पर बैठक आयोजित होगी। सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

‌विदित हो कि ओबीसी समाज के वरिष्ठ नेता दशरथ पाटील के नेतृत्व में ओबीसी जनमोर्चा का एक शिष्टमंडल आज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिला। शिष्टमंडल के माध्यम से कहा गया कि बंठिया आयोग की रिपोर्ट संदेहास्पद है। जिस कारण ठाणे शहर में ओबीसी समाज से संबद्ध पारदर्शक जातीनिहाय मिनी सर्वे कराया जाए। साथ ही मांग की गई कि ठाणे महापालिका के स्तर पर ओबीसी लोक प्रतिनिधि की प्रभाग संख्या में भी बढ़ोतरी कर सरकार न्याय दें । ऐसी मांग ओबीसी जनमोर्चा के उपाध्यक्ष दशरथ पाटिल ने मुख्यमंत्री शिंदे से की। सीएम शिंदे को एक निवेदन भी शिष्ट मंडल की ओर से दिया गया।
‌ इन बातों की जानकारी देते हुए ओबीसी जनमोर्चा के उपाध्यक्ष दशरथ पाटील ने बताया कि राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे ने उनके निवेदन को काफी सकारात्मक अंदाज में लिया है। और उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस को लेकर सप्ताह के भीतर जल्द ही महत्वपूर्ण बैठक होगी। अपने निवेदन में
दशरथ पाटिल ने कहा है कि दिवा प्रभाग समिति में आगरी और कोली समाज के साथ ही कोकण के लोग बहुलता में रहते हैं। यहां उसकी 70% आबादी रहती है । यह प्रभाग सौ परसेंट ओबीसी समाज का रहते हुए भी बंठिया आयोग की रिपोर्ट में यहां केवल 2 सीट ओबीसी वर्ग को आरक्षण के माध्यम से दिया गया है। जो सरासर गलत है। दशरथ पाटिल का आरोप है कि इतना ही नहीं ठाणे शहर में ओबीसी के सीटों का प्रतिशत ठाणे महानगरपालिका में 35% से घटकर 14% पर आ गया है । यह स्थिति ओबीसी समाज पर सरासर अन्याय है। महाराष्ट्र में 1931 की जनगणना के अनुसार ओबीसी समाज की जनसंख्या 54% थी। उस समय महाराष्ट्र में ओबीसी वर्ग की 272 जातियां थी। लेकिन मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद महाराष्ट्र में ओबीसी जाति की संख्या 272 से बढ़कर 349 पर जा चुकी है । वही ओबीसी की जनसंख्या 52 प्रतिशत से कम कर उसे सही 30% पर लाया गया है। यह सारा कुछ संखिया आयोग की कारगुजारी के कारण हुआ है। जिस कारण इस आयोग के कार्य पद्धति को लेकर कभी भी चुनौती दी जा सकती है । और ऐसा प्रावधान भी है। दशरथ पाटिल का आरोप है कि संखिया आयोग की कार्य पद्धति विवादास्पद रही है। इनमें कई तरह की त्रुटियां सामने आ रही है। । सीएम शिंदे को ओबीसी जन मोर्चा के उपाध्यक्ष दशरथ पाटिल ने बताया कि इस समय ठाणे शहर की कुल जनसंख्या का 50% से अधिक हिस्सा ओबीसी वर्ग का है। लेकिन बंठिया आयोग में केवल १०.४ प्रतिशत ही दिखाया गया है। जिस पद्धति के आधार पर जातीय जनगणना की गई है, उसमें कई तरह की तकनीकी खामियां हैं। पाटिल ने सीएम शिंदे से आग्रह किया है कि बिहार सरकार की ही तरह महाराष्ट्र सरकार को भी स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए महानगरपालिका स्तर पर जातीनिहाय मिनी सर्वे कराया जाए । ताकि उनकी शंका का समाधान हो सके। दशरथ पाटिल ने बताया कि शिष्टमंडल को सीएम शिंदे ने सकारात्मक आश्वासन दिया है । जबकि जनमोर्चा के शिष्टमंडल में दशरथदादा पाटील के साथ ही शिवसेना ठाणे जिलाप्रमुख नरेश म्हस्के, पूर्व नगरसेवक उमेश पाटील, युवा सेना महासचिव राकेश पाटील, गजानन पवार, सुधीर पाटील, रविद्र पाटील, सिकंदर केणी, अशोक पाटील, मनोज पाटील, जय पाटील, संदीप पाटील, विजय पाटील, आतिष पाटील, गणेश पाटील, संतोष पाटील, मोरेश्वर पवार, पांडुरंग पवार, प्रकाश पाटील, मा. नगरसेवक दिनेश कांबळे, दुर्गेश चाळके, महेश गवारी, बापू गोसावी, नंदकुमार सुर्वे आदी मान्यवर भी शामिल थे।

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